महाराजगंज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के धुसवा कला गांव निवासी सूरज विश्वकर्मा की सऊदी अरब से सुरक्षित वतन वापसी हो गई है। सऊदी अरब में वर्षों तक कथित शोषण, वेतन न मिलने और प्रताड़ना का सामना करने के बाद सूरज 30 सितंबर को भारत लौट आए। उनकी वापसी में सोशल एक्टिविस्ट सैयद आबिद हुसैन, रियाद स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद टीम की अहम भूमिका रही। आबिद हुसैन को विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए ‘असली जिंदगी के बजरंगी भाईजान’ के नाम से भी जाना जाता है।
2018 में नौकरी के लिए गए थे सऊदी अरब
जानकारी के मुताबिक, सूरज विश्वकर्मा, घनश्याम विश्वकर्मा के बेटे हैं और महाराजगंज जिले की नौतनवा तहसील के अंतर्गत धुसवा कला गांव के निवासी हैं। वह 27 जुलाई 2018 को महाराजगंज के एक एजेंट के माध्यम से सऊदी अरब गए थे। उन्हें अल-कासिम और मदीना शरीफ के बीच स्थित एक गांव में खेती का काम करना था। इसके लिए उन्हें 800 सऊदी रियाल मासिक वेतन देने का वादा किया गया था।
बताया गया कि सूरज ने शुरुआती करीब एक साल तक एक स्पॉन्सर के लिए काम किया, लेकिन उन्हें पूरा भुगतान नहीं मिला। इसके बाद वह दूसरे स्पॉन्सर के संपर्क में आए। नए स्पॉन्सर ने उन्हें 1,200 रियाल वेतन के साथ भोजन, रहने और मोबाइल खर्च के लिए भत्ता देने का आश्वासन दिया। साथ ही स्पॉन्सरशिप ट्रांसफर यानी कफाला प्रक्रिया पूरी कराने और एक साल बाद भारत वापस भेजने की बात कही।
सात साल तक काम, वेतन नहीं मिलने का आरोप
सूरज विश्वकर्मा के मामले में आरोप है कि नए स्पॉन्सर ने उन्हें कई वर्षों तक काम कराया, लेकिन स्पॉन्सरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं की। शुरुआती कुछ भुगतानों के बाद उन्हें लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। आरोप यह भी है कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और कई बार मारपीट की गई।
सैयद आबिद हुसैन के मुताबिक, सूरज बेहतर वैवाहिक जीवन और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद लेकर विदेश गए थे। उनकी शादी 28 अप्रैल 2018 को हुई थी। लेकिन विदेश में कथित प्रताड़ना के कारण वह वर्षों तक अपने घर नहीं लौट सके।
सैयद आबिद हुसैन तक पहुंचा मामला
आबिद हुसैन के अनुसार, सूरज का मामला जुलाई में उनके सामने आया। उसी दौरान उन्होंने रियाद स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से प्रदीप नाम के एक अन्य प्रवासी मजदूर को भी उसी स्पॉन्सर के कथित चंगुल से निकालने में सहायता की थी।
इसके बाद आबिद हुसैन ने सूरज की स्थिति से भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सूरज ने फोन पर अपनी परेशानी साझा की थी और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उनके अनुसार, सूरज ने कई बार वहां से निकलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके।
दूतावास की कोशिशों के बाद भी बढ़ी परेशानी
आबिद हुसैन के मुताबिक, भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सूरज के स्पॉन्सर से संपर्क किया और सूरज को मदद का भरोसा दिलाया। स्पॉन्सर ने कथित तौर पर करीब डेढ़ महीने बाद सूरज को भारत भेजने की सहमति दी थी, लेकिन तय समय पर ऐसा नहीं हुआ। आरोप है कि इसके बाद सूरज की परेशानी और बढ़ गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दूतावास ने सूरज को सुरक्षित निकालने के लिए अधिकारियों की एक टीम बनाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर को सूरज को सुरक्षित निकाला गया और दूतावास ने उन्हें एक होटल में ठहराया। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 30 सितंबर को उन्हें सुरक्षित भारत वापस भेज दिया गया।
लखनऊ एयरपोर्ट पर आबिद हुसैन ने की अगवानी
भारत लौटने पर सैयद आबिद हुसैन ने लखनऊ एयरपोर्ट पर सूरज की अगवानी की। इसके बाद वह उन्हें महाराजगंज जिले के उनके पैतृक गांव धुसवा कला तक लेकर पहुंचे। इस तरह वर्षों से घर लौटने का इंतजार कर रहे सूरज अपने परिवार से दोबारा मिल सके।
भारतीय दूतावास और मदद टीम का जताया आभार
सैयद आबिद हुसैन ने इस पूरे अभियान में सहयोग के लिए सऊदी अरब में भारत के राजदूत विपुल, सामुदायिक कल्याण के काउंसलर वाई. साबिर, दूतावास के अधिकारियों आशिक और शराफू, अन्य कर्मचारियों, इंडियन माइग्रेंट सपोर्ट सेंटर तथा विदेश मंत्रालय की ‘मदद’ (MADAD) टीम का आभार जताया। सूरज विश्वकर्मा ने भी अपनी सुरक्षित वापसी में सहयोग करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया।
विदेश में नौकरी करने वालों के लिए जरूरी संदेश
सूरज विश्वकर्मा की वापसी विदेश में नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए सतर्कता का संदेश है। विदेश जाने से पहले एजेंट की विश्वसनीयता, नौकरी देने वाली कंपनी, वेतन, काम के घंटे और रोजगार से जुड़े दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है। किसी भी तरह के शोषण या संकट की स्थिति में संबंधित भारतीय दूतावास और आधिकारिक सहायता तंत्र से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।
सूरज की वतन वापसी में सामाजिक कार्यकर्ता, भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की संयुक्त कोशिशों ने अहम भूमिका निभाई। उनके परिवार के लिए यह वर्षों के इंतजार के बाद राहत और खुशी का पल है।
