लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गोबरधन योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं। गोबर और जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से न केवल गांवों में स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि इससे ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन कर पंचायतों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 तक ग्राम पंचायतों ने जैविक खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री से 28 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है, जिससे पंचायतों की स्वयं की आय (ओएसआर) में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस योजना का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। आय के मामले में ललितपुर जिला सबसे आगे है, जहां ग्राम पंचायतों ने 3,37,990 रुपये की आय अर्जित की है। इसके बाद श्रावस्ती में 2,87,036 रुपये तथा रामपुर में 1,23,400 रुपये की आय दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह योजना गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
गोबरधन योजना के तहत स्थापित बायोगैस संयंत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। प्रदेश के 74 जनपदों में 116 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें गोबर, रसोई कचरा और कृषि अवशेषों का उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद तैयार की जा रही है। इस ऊर्जा का उपयोग स्थानीय स्तर पर विभिन्न कार्यों में किया जा रहा है। रामपुर जिले में बायोगैस से तेल पिराई मशीन संचालित हो रही है, जबकि आगरा, ललितपुर, श्रावस्ती, बुलंदशहर, बांदा, सोनभद्र और हरदोई में आटा चक्कियों का संचालन इसी ऊर्जा से किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल रही हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
इस योजना के माध्यम से तैयार जैविक खाद का उपयोग किसानों द्वारा जैविक खेती में किया जा रहा है, जिससे खेती की लागत में कमी आ रही है और भूमि की उर्वरता में सुधार हो रहा है। साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह पहल कचरे को संसाधन में बदलने का एक सफल उदाहरण बनकर उभर रही है।
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार गांवों को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। गोबरधन योजना के माध्यम से कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पंचायतों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय विकास कार्यों को भी गति मिल रही है।
निदेशक पंचायती राज विभाग अमित कुमार सिंह ने कहा कि गोबरधन योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वच्छता को बढ़ावा देने का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। पंचायतों द्वारा जैविक खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री से स्वयं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, गोबरधन योजना उत्तर प्रदेश में स्वच्छता, ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ते हुए गांवों को समृद्धि की ओर अग्रसर कर रही है।
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