लखनऊ: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र एवं आचार्यशंकर भारतोद्भाभाषक मंडल के संयुक्त तत्वावधान में “वैश्विक वैविध्य में एकत्व का आधार अद्वैत और आचार्यशंकर” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्वानों ने आचार्य शंकर के अद्वैत दर्शन को वर्तमान विश्व के लिए प्रासंगिक बताते हुए इसे वैश्विक एकता का आधार बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने आचार्य शंकराचार्य के जीवन एवं दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका अद्वैतवाद विश्व बंधुत्व और समरसता की भावना को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि अनेक धर्मों और विचारधाराओं में इस दर्शन के तत्व स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता संजय श्रीहर्ष ने आचार्य शंकर के व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार्य शंकर के विचार आधुनिक समय के तनाव, संघर्ष और वैचारिक संकट से जूझ रही दुनिया के लिए समाधान प्रस्तुत करते हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित श्री राम बाबू पाण्डेय ने आचार्य शंकर के दर्शन के गूढ़ पक्षों की व्याख्या आत्मा और जीव के संबंधों के व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का चिंतन भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है।
कार्यक्रम का आयोजन आईकेएस के नोडल अधिकारी डॉ. नीरज शुक्ला, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. राजकुमार सिंह एवं श्रीमती आफरीन फातिमाद्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज शुक्ला ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रोफेसर, शिक्षक, शोध छात्र एवं शहर के अनेक ख्यातिप्राप्त विद्वान उपस्थित रहे। संगोष्ठी में आचार्य शंकर के विचारों पर गंभीर मंथन हुआ तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक महत्व पर विशेष चर्चा की गई।
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