कतर में फंसे अमेठी के अजीत कुमार की सुरक्षित वतन वापसी, सैयद आबिद हुसैन और भारतीय दूतावास की अहम भूमिका

कतर में फंसे अमेठी के अजीत कुमार की सुरक्षित वतन वापसी, सैयद आबिद हुसैन और भारतीय दूतावास की अहम भूमिका

लखनऊ के एजेंट पर झूठे नौकरी के वादे का आरोप, 20 घंटे काम कराने की बात आई सामने

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के रहने वाले अजीत कुमार को कतर में कथित रूप से नौकरी के नाम पर शोषण का सामना करने के बाद सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। उनकी वतन वापसी में सोशल एक्टिविस्ट सैयद आबिद हुसैन, भारतीय दूतावास (दोहा) और विदेश मंत्रालय के प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र की अहम भूमिका रही।

अजीत कुमार की सुरक्षित वापसी के बाद उनके परिवार ने राहत की सांस ली। भारत लौटने के बाद अजीत ने 7 अक्टूबर को एक वीडियो जारी कर अपनी परेशानी साझा की और मदद करने वालों के प्रति आभार जताया।

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नौकरी के वादे पर कतर गए थे अजीत कुमार

मिली जानकारी के अनुसार, अमेठी निवासी अजीत कुमार लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र के एक एजेंट के माध्यम से नौकरी के लिए दोहा, कतर गए थे। आरोप है कि विदेश भेजने से पहले एजेंट ने उन्हें स्पॉन्सर के घर पर प्रतिदिन आठ घंटे काम, 1,600 कतरी रियाल वेतन और 250 कतरी रियाल भोजन भत्ता देने का आश्वासन दिया था।

हालांकि, कतर पहुंचने के बाद अजीत कुमार के सामने परिस्थितियां कथित तौर पर बिल्कुल अलग निकलीं। उनके अनुसार, उनसे प्रतिदिन करीब 20 घंटे काम कराया जाता था और भोजन के लिए कोई भत्ता या पैसा नहीं दिया जाता था। अजीत ने वहां दुर्व्यवहार और मानसिक व शारीरिक परेशानी का सामना करने की बात भी बताई।

भाई ने सैयद आबिद हुसैन से मांगी मदद

अजीत कुमार की परेशानी की जानकारी मिलने पर उनके भाई रवि ने 12 सितंबर को सोशल एक्टिविस्ट सैयद आबिद हुसैन से संपर्क किया। सैयद आबिद हुसैन को विदेशों में संकट में फंसे भारतीयों की मदद के लिए ‘असली जिंदगी के बजरंगी भाईजान’ के नाम से भी जाना जाता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आबिद हुसैन ने कतर स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र की मदद टीम से संपर्क किया। इसके बाद अजीत कुमार को सहायता दिलाने के लिए प्रयास शुरू किए गए।

भारतीय दूतावास और कतर CID की कोशिशों से हुई वापसी

दी गई जानकारी के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों और स्थानीय एजेंसियों की मदद से अजीत कुमार को उनके नियोक्ता के घर से निकालकर भारतीय दूतावास पहुंचाया गया, जहां उनका मामला औपचारिक रूप से दर्ज किया गया।

इसके बाद भारतीय दूतावास और कतर की CID की संयुक्त कोशिशों से उनकी भारत वापसी का रास्ता तैयार हुआ। 6 अक्टूबर को अजीत कुमार सुरक्षित भारत लौट आए।

मददगारों का जताया आभार

भारत पहुंचने के बाद अजीत कुमार ने 7 अक्टूबर को जारी वीडियो में अपनी परेशानी साझा की और सैयद आबिद हुसैन तथा भारतीय दूतावास का धन्यवाद किया।

वहीं, सैयद आबिद हुसैन ने भी इस सहायता अभियान में सहयोग के लिए दोहा स्थित भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

विदेश में नौकरी के लिए जाने वालों को सावधानी बरतने की सलाह

यह घटना विदेश में नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए सतर्क रहने का संदेश देती है। विदेश जाने से पहले नौकरी देने वाली कंपनी, एजेंट, वेतन, काम के घंटे और रोजगार से संबंधित दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।

सैयद आबिद हुसैन ने भी लोगों को विदेश यात्रा और रोजगार के दौरान सावधानी बरतने तथा अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। एजेंट के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध नहीं है।

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