अंबेडकरनगर: जनपद अंबेडकर नगर के ग्राम डुहिया, थाना कोतवाली टांडा निवासी रवींद्र कुमार यादव द्वारा दर्ज कराए गए परिवार रजिस्टर में कूटरचना, फर्जीवाड़ा और जालसाजी के गंभीर मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग, लखनऊ द्वारा दिए गए स्पष्ट आदेश के बावजूद सात सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विवेचना पूरी नहीं की गई है।
पीड़ित रवींद्र कुमार यादव ने आरोप लगाया है कि मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि प्रभावशाली विपक्षीगण और पूर्व विवेचक को बचाया जा सके। मानवाधिकार आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अंबेडकर नगर को निर्देशित किया था कि छह सप्ताह के भीतर शिकायतकर्ता को सम्मिलित करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई कर आयोग को अवगत कराया जाए, लेकिन अब तक आदेश का अनुपालन नहीं हो सका है।
मामला परिवार रजिस्टर में बड़े पैमाने पर कूटरचना से जुड़ा है। आरोप है कि परिवार रजिस्टर के क्रम संख्या 10 व 11 पर नाम, लिंग, जन्म-मृत्यु विवरण में छेड़छाड़ की गई, जबकि क्रम संख्या 19 व 20 पर रामनयन व कलावती के नाम बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के अवैध रूप से दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त फर्जी वसीहत तैयार किए जाने का भी गंभीर आरोप है।
पीड़ित द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंबेडकर नगर के आदेश पर दिनांक 03 अप्रैल 2025 को मु0अ0सं0-84/2025 के अंतर्गत ग्रामसभा के ही मुन्नर पुत्र रामफेर, मित्रसेन, बृजेश, बलिराम पुत्रगण राजाराम (पूर्व प्रधान), नीलेश, निखिल पुत्रगण मुन्नर एवं 3-4 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
मामले की प्रारंभिक विवेचना उप निरीक्षक दिनेश चंद्र मौर्य द्वारा की जा रही थी, जिन पर आरोप है कि उन्होंने निजी स्वार्थ और कथित घूस के चलते विपक्षियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए पीड़ित द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को विवेचना में शामिल नहीं किया। इस संबंध में पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से शिकायत कर दूषित विवेचना के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराई।
शिकायतों की सुनवाई के बाद पुलिस अधीक्षक अंबेडकर नगर ने अपने पत्र संख्या-52/2025 (विवेoस्थाo) दिनांक 07-11-2025 के माध्यम से विवेचना को थाना कोतवाली टांडा से स्थानांतरित कर थाना अलीगंज कर दिया तथा उप निरीक्षक हरिकेश बहादुर को नया विवेचक नियुक्त किया गया। साथ ही प्रभारी निरीक्षक थाना अलीगंज को व्यक्तिगत रुचि लेकर शीघ्र विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि पीड़ित का आरोप है कि पूर्व विवेचक दिनेश चंद्र मौर्य द्वारा नए विवेचक को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे निष्पक्ष जांच पर संकट मंडरा रहा है। पीड़ित ने मांग की है कि दिनेश चंद्र मौर्य का तत्काल प्रभाव से किसी कम लाभ के पद पर अथवा अन्य जनपद में स्थानांतरण किया जाए, ताकि निष्पक्ष व न्यायसंगत विवेचना संभव हो सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि मानवाधिकार आयोग के आदेशों की अनदेखी और पुलिस की कथित उदासीनता पर जिम्मेदार अधिकारी कब कार्रवाई करेंगे, या फिर पीड़ित को न्याय के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
मानवाधिकार आयोग के आदेश की अनदेखी, सात सप्ताह बाद भी विवेचना अधूरी
मानवाधिकार आयोग के आदेश की अनदेखी, सात सप्ताह बाद भी विवेचना अधूरी
