अम्बेडकरनगर: दीवारों पर ईमानदारी, फर्श पर बेईमानी 

बसखारी के टड़वा दरब का पंचायत भवन बना भ्रष्टाचार का मॉडल नमूना!

अम्बेडकरनगर: विकासखंड बसखारी की ग्राम सभा टड़वा दरब में बना पंचायत भवन आज गांव के विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि “कैसे न करें निर्माण” का जीवंत प्रशिक्षण केंद्र बन चुका है।

भवन की हालत देखकर लगता है कि यह इमारत नहीं, बल्कि व्यवस्था की आत्मकथा है वो भी बिना संपादन के। पंचायत भवन की दीवार पर बड़े ही आत्मविश्वास से लिखा है, ईमानदारी पूर्वक किया गया काम मन और आत्मा को सुकून देता है। लेकिन अफसोस, यह वाक्य अब प्रेरणा नहीं, व्यंग्य का पोस्टर बन चुका है।

दीवारों पर लिखा आदर्श वाक्य और दीवारों में उभरती दरारें आपस में ऐसी जुगलबंदी कर रही हैं कि खुद ईमानदारी भी शरमा जाए।भवन बने अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता, लेकिन हालात ऐसा कि लगता है, मानो निर्माण के समय सीमेंट को गेस्ट अपीयरेंस दिया गया हो और बालू को पूर्ण स्वतंत्रता संग्राम लड़ने की छूट मिली हो। टाइल्स फर्श छोड़कर ऐसे भाग रही हैं, जैसे खुद को इस घोटाले से अलग करना चाहती हों। नीचे झांकती सामग्री ग्रामीणों को बिना जांच रिपोर्ट के ही सबूत सौंप रही हो। दीवारों में आई दरारें किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि प्रधान और सचिव की निर्माण-नीति का ऑटोग्राफ हैं।

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ईंट और सीमेंट का तालमेल ऐसा बिगड़ा है, मानो दोनों ने तय कर लिया है ,इस ईमानदारी के साथ हम नहीं रह सकते। सफाई व्यवस्था भी उसी ‘ईमानदार’ सोच का अनुसरण कर रही है। पंचायत भवन का मुख्य द्वार कूड़े के ढेर से ऐसे सजा रहता है जैसे किसी समारोह का स्वागत द्वार हो। झाड़ू शायद रास्ता भटक गई है या फिर उसे भी अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली। पंचायत सहायक का कमरा देखकर लगता है कि यहां काम कम और धूल संरक्षण योजना ज़्यादा चल रही है।

कुर्सियों और फर्श पर जमी मिट्टी यह साफ बता रही है कि इस भवन का उपयोग प्रशासन के लिए नहीं, उपेक्षा के संग्रहालय के रूप में हो रहा है। ग्रामीणों में चर्चा है कि अगर निर्माण में मानक और गुणवत्ता का जरा-सा भी ध्यान रखा गया होता, तो पंचायत भवन इतनी जल्दी “बीमार” न पड़ता। यह भवन गांव के विकास का केंद्र बनना था, लेकिन अब यह लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कब्रगाह बन चुका है। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पंचायत भवन के निर्माण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि सरकारी धन सच में जनता की सेवा में लगे ना कि दीवारों पर लिखे नारों में दम तोड़ दे। 

दीवारों पर ईमानदारी, फर्श पर बेईमानी 

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  • हरीलाल प्रजापति

    मैं पत्रकार हरीलाल प्रजापति हूं जो हर खबर को अपनी योग्यता और प्रमाण के साथ सत्यापित करके प्रकाशित करता हु

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