Ajmer: अजमेर शरीफ दरगाह, राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित, सूफी संत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की समाधि है। यह भारत का एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो अपनी आध्यात्मिकता और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। इसे “गरीब नवाज़” के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है “गरीबों का संरक्षक”।
अजमेर दरगाह का इतिहास
- ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जीवन:
- उनका जन्म 1141 ईस्वी में सिस्तान (अब ईरान) में हुआ था।
- वे 12वीं शताब्दी में भारत आए और अजमेर को अपनी कर्मभूमि बनाया।
- उन्होंने मानवता, समानता और भाईचारे की शिक्षा दी।
- दरगाह का निर्माण:
- यह 13वीं शताब्दी में उनके अनुयायियों द्वारा उनकी मृत्यु के बाद बनाया गया।
- मुग़ल सम्राटों ने दरगाह का विस्तार और सौंदर्यीकरण किया।
- शाहजहां ने “शाहजहानी दरवाजा” और अकबर ने यहां भव्य हॉल बनवाया।
अजमेर दरगाह का महत्व
- सभी धर्मों का स्वागत:
दरगाह में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ आते हैं।
यहाँ किसी के धर्म, जाति या समाज के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। - उर्स महोत्सव:
- ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्यतिथि (उर्स) पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं।
- यह त्योहार सूफी संगीत, कव्वाली और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है।
- दुआ और आशीर्वाद का स्थान:
- श्रद्धालु दरगाह पर मन्नत मांगने और शांति की तलाश में आते हैं।
- यहाँ की “चादर चढ़ाने” की परंपरा प्रसिद्ध है।
अजमेर दरगाह से जुड़े विवाद और सच्चाई
- धार्मिक विवाद:
- कुछ धार्मिक समूहों द्वारा इसे “मुस्लिम स्थल” के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन सच्चाई यह है कि यह मानवता का प्रतीक है।
- यह स्थल सभी धर्मों के लिए खुले दरवाजे का प्रतिनिधित्व करता है।
- अतिक्रमण के मुद्दे:
- हाल के वर्षों में दरगाह के आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामले सामने आए हैं।
- प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार कार्रवाई की गई।
- धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक:
- यह दरगाह सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है और इसे भारत की विविधता और एकता का अद्भुत उदाहरण माना जाता है।
अजमेर दरगाह कैसे पहुंचे और यात्रा सुझाव
- स्थान:
- अजमेर शहर, राजस्थान।
- नजदीकी रेलवे स्टेशन: अजमेर जंक्शन।
- हवाई अड्डा: जयपुर।
- परिधान:
- श्रद्धालुओं को दरगाह में शालीन और सम्मानजनक परिधान पहनने की सलाह दी जाती है।
- आस्था और श्रद्धा:
- मन्नत मांगने वाले श्रद्धालु फूल, चादर, या खाद्य सामग्री चढ़ाते हैं।
अजमेर दरगाह का संदेश
अजमेर दरगाह मानवता, प्रेम, और सहिष्णुता का प्रतीक है। यह एक ऐसा स्थान है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद लोगों को एकजुट करता है।
विवाद और सच्चाई
अजमेर शरीफ दरगाह में मंदिर होने के दावे को लेकर हाल ही में कानूनी विवाद सामने आया है। 20 दिसंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट पश्चिम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने याचिका दायर की थी। उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि दरगाह का मूल स्वरूप मंदिर था। इस मामले में दरगाह कमेटी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अल्पसंख्यक मामलों के विभाग को नोटिस जारी किए गए हैं। दरगाह दीवान के पुत्र नसरुद्दीन अली ने भी पक्षकार बनने की अर्जी लगाई है, क्योंकि वे ख्वाजा साहब के वंशज हैं।मुस्लिम पक्षकारों ने इस याचिका को खारिज करने की मांग की है, जबकि हिंदू पक्ष ने ऐतिहासिक प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। अगली सुनवाई 24 जनवरी 2025 को निर्धारित की गई है। इस विवाद के परिणामस्वरूप, अजमेर दरगाह के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर चर्चा हो रही है, जो भारत की सांप्रदायिक सौहार्द और विविधता का प्रतीक है।
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