अम्बेडकरनगर: विकास खण्ड बसखारी की ग्राम पंचायत बेलापरसा इन दिनों मिट्टी से ज़्यादा कागज़ी कमाल के लिए सुर्खियों में है। आरोप है कि जहां ज़मीन पर महज 6 ट्रॉली मिट्टी डाली गई, वहीं सरकारी फाइलों में उसका वजन इतना बढ़ गया कि 92 हजार रुपये का बिल आराम से पास हो गया। मामले की खास बात यह है कि मिट्टी जमीन पर कम और फाइलों में ज़्यादा दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सच में 92 हजार की मिट्टी पटाई हुई होती, तो आज बेलापरसा में पहाड़ खड़ा नजर आता। लेकिन हकीकत में हालात ऐसे हैं कि मिट्टी ढूंढने के लिए भी जांच कमेटी को मैग्नीफाइंग ग्लास की जरूरत पड़ जाए।
आसमान से गिरी जांच, खजूर पर अटकी
मामले में शिकायत के बाद जांच तो जरूर बैठी, लेकिन उसकी रफ्तार ऐसी है कि कछुआ भी शरमा जाए। जांच कब शुरू हुई, क्या जांच हुई और कब पूरी होगी ये सवाल खुद जांच एक पहेली बनी हुई हैं।टॉलरेंस” की मिट्टी में दब गई है। आरोप यह भी है कि जांच फील्ड तक पहुंचने से पहले ही फाइलों के दलदल में धंस चुकी है।
मिट्टी पटाई या कागज़ पटाई?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर यहां मिट्टी पटाई हुई या फिर कागज़ पटाई का रिकॉर्ड तैयार किया गया? 6 ट्रॉली मिट्टी में 92 हजार रुपये उड़ाने का खेल ग्रामीणों को समझ से परे है, लेकिन फाइलें पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रही हैं।
DM के आदेश भी बेअसर?
बताया जाता है कि मामले में जिलाधिकारी के आदेश भी जारी हुए, लेकिन ज़मीनी हकीकत पर उनका असर वैसा ही रहा, जैसा सूखी मिट्टी पर पानी की एक बूंद का। जांच आज भी फाइलों में कैद है और जवाबदेही रास्ता भटक चुकी है।
भ्रष्टाचार की मिट्टी, जांच की सुस्ती
बेलापरसा पंचायत का यह मामला अब सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे विकास खण्ड बसखारी में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संदेश होगा कि, यहां मिट्टी नहीं, भरोसा डाला जा रहा है—और वो भी बिना नाप-तौल के। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच कराई जाए, दोषियों से वसूली हो और कार्रवाई सार्वजनिक की जाए, ताकि भविष्य में 6 ट्रॉली मिट्टी 92 हजार का पहाड़ न बन जाए।
आरोप 6 ट्रॉली मिट्टी, 92 हजार का बिल,बसखारी में कागज़ों ने खड़ा कर दिया मिट्टी का पहाड़
