अंबेडकरनगर: जहाँ पंचायत भवन नहीं, वहाँ कुर्सियाँ बैठीं… कंप्यूटर चला कौन रहा है?

जहाँ पंचायत भवन नहीं, वहाँ कुर्सियाँ बैठीं… कंप्यूटर चला कौन रहा है? फ़ाइल फ़ोटो

जहाँ पंचायत भवन नहीं, वहाँ कुर्सियाँ बैठीं… कंप्यूटर चला कौन रहा है?

फरीदपुर सैफन में ‘अदृश्य पंचायत भवन’ बना भ्रष्टाचार का ठिकाना!

 

अंबेडकरनगर जनपद के विकास खंड बसखारी अंतर्गत ग्राम पंचायत फरीदपुर सैफन इन दिनों एक अनोखे कारनामे को लेकर चर्चा में है। यहां पंचायत भवन ऐसा है, जो कागजों में पूरी शान से खड़ा है , लेकिन जमीन पर आज तक किसी ने उसकी शक्ल नहीं देखी। ग्रामीण हैरान हैं कि जब पंचायत भवन बना ही नहीं, तो फिर उसके नाम पर कम्प्यूटर, प्रिंटर, कुर्सी-मेज, फर्नीचर, इन्वर्टर-बैटरी और सीसी कैमरे आखिर किस दीवार पर टांगे गए और किस छत के नीचे रखे गए? 

गांव में चर्चा है कि शायद यह पंचायत भवन वाई-फाई नहीं , वायु मार्ग से चलता है—जो दिखता नहीं, लेकिन भुगतान पूरे ठाठ से लेता है।

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2020 से 2022 तक चला ‘खरीद महोत्सव’ 

प्राप्त अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2020 से 2022 के बीच पंचायत भवन के नाम पर कई बार लाखों रुपये का भुगतान किया गया। मजेदार बात यह है कि कुछ सामानों की खरीद बार-बार दिखाई गई—यानी एक कुर्सी ने शायद कई बार जन्म लिया और कई बार बिल बनवाया।

ग्रामीण पूछ रहे हैं

“अगर भवन ही नहीं है, तो सीसी कैमरा किसकी निगरानी कर रहा है?”

“कम्प्यूटर कौन चला रहा है—भूत, भविष्य या प्रधान जी का निजी दफ्तर?”

प्रधान जी बोले— जमीन थी… पर कब्जा हो गया 

मामले में ग्राम प्रधान से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि पंचायत भवन के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन लेखपाल उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। प्रधान जी का यह भी कहना है कि जो जमीन थी, उस पर पहले से ग्रामीणों ने मकान बनाकर कब्जा कर लिया है, इसलिए निर्माण संभव नहीं हो सका। अब सवाल यह उठता है कि जब जमीन ही नहीं थी, तो फिर खरीद किस भरोसे की गई? 

क्या पहले सामान आ गया और बाद में भवन आने की उम्मीद थी?

सरकार की योजना, कागजों की उड़ान

एक तरफ ओर सरकार गांव-गांव पंचायत भवन बनवाकर डिजिटल इंडिया, वाई-फाई और सुविधाओं की बात कर रही है, तो वहीं फरीदपुर सैफन में सुविधाएं नहीं, सिर्फ फाइलों में विकास दौड़ रहा है। 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी की ओर इशारा करता है, जिसमें ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और जिम्मेदार अधिकारी सवालों के घेरे में हैं।

अब देखना यह है कि 

 क्या कभी फरीदपुर सैफन को असली पंचायत भवन नसीब होगा?_ 

  • या फिर यह गांव यूं ही कागजी कुर्सियों और अदृश्य कैमरों के सहारे विकास की कहानी सुनता रहेगा?

जांच की मांग तेज, जवाब अभी गायब।

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  • हरीलाल प्रजापति

    मैं पत्रकार हरीलाल प्रजापति हूं जो हर खबर को अपनी योग्यता और प्रमाण के साथ सत्यापित करके प्रकाशित करता हु

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