उतार प्रदेश: आबिद की कोशिशों से नाइजर में अगवा किए गए झारखंड के पांच मज़दूर आठ महीने बाद सुरक्षित घर लौटे, परिवारों में खुशी की लहर

आबिद की कोशिशों से नाइजर में अगवा किए गए झारखंड के पांच मज़दूर आठ महीने बाद सुरक्षित घर लौटे, परिवारों में खुशी की लहर

उतार प्रदेश: झारखंड के गिरिडीह ज़िले के बगोदर क्षेत्र के पांच मज़दूर, जो अफ्रीकी देश नाइजर में अपहरण का शिकार हो गए थे, आठ महीने बाद सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। इन मज़दूरों की वापसी से न केवल उनके परिवारों में बल्कि पूरे इलाके में खुशी और राहत का माहौल है।

डोंडलो गांव के राजू महतो, फलजीत महतो और चंद्रिका महतो सोमवार देर शाम अपने घर पहुंचे, जबकि डोंडलो गांव के ही संजय महतो और मुंडरो गांव के उत्तम महतो रविवार शाम को घर लौट आए थे। परिजनों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया।

यह पूरा मामला अप्रैल 2025 का है, जब नाइजर में काम कर रहे झारखंड के इन पांच भारतीय मज़दूरों को आतंकियों ने अगवा कर लिया था। इस गंभीर मामले की जानकारी झारखंड के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन तक पहुंची, जिन्हें उनके मानवीय कार्यों के कारण ‘रियल-लाइफ बजरंगी भाईजान’ के नाम से जाना जाता है। यह सूचना उन्हें मोहम्मद सरताज आलम के माध्यम से मिली।

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मामले की जानकारी मिलते ही आबिद हुसैन ने तुरंत विदेश मंत्रालय के प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) और नाइजर की राजधानी नियामे स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया। उन्होंने लगातार पत्राचार और फॉलो-अप के ज़रिये मज़दूरों की रिहाई के लिए प्रयास जारी रखे।

लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप फलजीत महतो (नारायण महतो के पुत्र), राजू कुमार उर्फ राजू महतो (फागू महतो के पुत्र), चंद्रिका महतो (शंकर महतो के पुत्र), संजय महतो (जगेश्वर महतो के पुत्र) और उत्तम महतो (तालो महतो के पुत्र) को सुरक्षित रिहा कर भारत वापस लाया गया।

नियामे स्थित भारतीय दूतावास के सेकंड सेक्रेटरी एवं हेड ऑफ चांसरी माननीय सत्यवीर सिंह ने आबिद हुसैन को ईमेल के माध्यम से इस खुशखबरी की पुष्टि की। ईमेल में लिखा गया,
“मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अप्रैल 2025 में नाइजर में आतंकवादियों द्वारा अगवा किए गए झारखंड के पांच मज़दूरों को रिहा कर दिया गया है और वे अब भारत में अपने परिवारों के साथ सुरक्षित हैं।”

मज़दूरों की सुरक्षित वापसी के बाद आबिद हुसैन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK), विदेश मंत्रालय, भारत सरकार और नाइजर स्थित भारतीय दूतावास की पूरी टीम का दिल से आभार व्यक्त किया।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सही समय पर की गई पहल, मानवीय संवेदनाएं और सरकारी सहयोग से असंभव लगने वाले काम भी संभव हो सकते हैं।

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